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International Gita Mahotsav : कुरुक्षेत्र महोत्सव पर पहुंची सवा लाख रुपए की पश्मीना शॉल

• LAST UPDATED : December 22, 2023
  • एक पश्मीना को तैयार करने में लगता है करीब एक साल 

इशिका ठाकुर, India News (इंडिया न्यूज़), International Gita Mahotsav, चंडीगढ़ : अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव 2023 पर प्रदेश के अलग-अलग राज्यों से शिल्पकार पहुंचकर अपनी प्रदर्शनी लगाए हुए हैं जो यहां पर आए हुए लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं। कश्मीर के पल गांव से आए हुए शिल्पकारों की पशमीना शॉल अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर आए हुए पर्यटकों का मन मोह रही है। इस शॉल की खास बात यह है कि यह सालों में तैयार होती है जिसकी कीमत लाखों रुपए में होती है। हालांकि अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर वह 125000 तक की शॉल लेकर आए हुए हैं।

6 लाख रुपए तक की शॉल भी करते हैं तैयार

कश्मीर से आए हुए शिल्पकार जावेद नवी ने कहा कि वह पिछले 8 वर्षों से अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव पर आ रहे हैं उनके परिवार के बड़े सदस्य पिछले चार दशकों से पशमीना शॉल बनाने का काम कर रहे हैं और उन्होंने अब तक सबसे महंगी 6,00,000 रुपए तक की शॉल बनाई है। दसवीं की पढ़ाई करने के बाद अपने पिता का हाथ बटाना शुरू किया था और तब से ही वह पशमीना शॉल बना रहे हैं।

परिवार को मिल चुके कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार

शिल्पकार जावेद नवी ने कहा कि उनके बड़े भाई और उनके पिता को 2006 और 2012 में राष्ट्रीय अवाॅर्ड भी मिल चुके हैं, वहीं उनके परिवार के एक सदस्य को इंडिया इंटरनेशनल फ्रेंडशिप समिति की तरफ से 2015 में अंतरराष्ट्रीय स्तर के राष्ट्रीय गौरव अवाॅर्ड से भी सम्मानित किया जा चुका है। इस काम में उनकी पांचवीं पीढ़ी भी लगी हुई है। उनके दादा और परदादा भी यही काम करते थे। उन्होंने कहा कि पशमीना शॉल की खासियत यह है कि यह मुगल काल के समय से चलती आ रही है। मुगल काल में जो राजा होते थे, वह भी इस शॉल का प्रयोग करते थे।

वर्षों में होती है पशमीना शॉल तैयार

उन्होंने कहा कि उनकी कई पीड़ियां इस काम को करती आ रही हैं और उन्होंने अभी तक 5000 से लेकर 6 लाख तक की शॉल तैयार की है, जिस व्यक्ति की जो डिमांड होती है, उस डिमांड के आधार पर ही वह शॉल तैयार करते हैं जिसमें हाथ का काम ज्यादा होता है तो उसमें पैसा भी ज्यादा लगता है और समय भी ज्यादा लगता है। 600000 की शॉल बनाने में उनकाे करीब 3 साल लग गए थे, लेकिन ज्यादा रेट की शॉल वह सिर्फ ऑर्डर पर ही तैयार करते हैं। अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर एक लाख रुपए तक की लोग खरीदारी करते हैं।

गुणवत्ता ऐसी कि अंगूठी में से निकल जाती है शॉल

शॉल की गुणवत्ता ऐसी होती है कि वह बहुत ही मुलायम और गर्म होती है जिसके चलते पहाड़ी क्षेत्र में रहने वाले लोग इसको ज्यादा पसंद करते हैं क्योंकि सर्दी से बचने के लिए यह बहुत ही ज्यादा कारगर होती है और मुलायम और हल्की होने के चलते इसको हर कोई पसंद करता है। यह शॉल ऐसी होती है कि एक छोटी सी अंगूठी में से भी शॉल आसानी से निकल जाती है। वही यहां पर वह कई प्रकार की वैरायटी इसमें लेकर आए हैं जिनको अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव पर लोग खूब पसंद कर रहे हैं।

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