Gyanvapi-Shringar Gauri episode: ज्ञानवापी-श्रंगार गौरी प्रकरणः इलाहाबाद हाईकोर्ट में हिंदू पक्ष की बड़ी जीत, श्रंगार गौरी की पूजा वाली याचिका सुनवाई योग्य

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India News (इंडिया न्यूज),Gyanvapi-Shringar Gauri episode,इलाहाबाद: ज्ञानवापी-श्रंगार गौरी मंदिर प्रकरण में हिंदू पक्ष की एक और बड़ी जीत हुई है। यह जीत इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही सुनवाई के दौरान हुई है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा है कि शृंगार गौरी की नियमित पूजा की मांग वाली याचीका सुनावई योग्य है। इसमें ऐसा कुछ भी अवांछनीय नहीं है कि मामले की सुनवाई न हो सके।

दरअसल, हिंदू पक्ष की पांच महिलाओं की ओर से एडवोकेट हरिशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने श्रंगार गौरी की नियमित पूजा के लिए न्यायलय में याचिका लगाई थी। इस पर मुस्लिम पक्ष की ओर से इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका लगाई गई कि ऑर्डर 7 रूल 11 के तहत श्रंगार गौरी की पूजा वाली याचिका पोषणीय नहीं है। इसलिए हिंदू पक्ष की याचिका पर विचार न किया जाए।

आज बुधवार 31 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसी प्रकरण पर अपना फैसला सुनाया और कहा कि अंजुमन इंतेजामिया कमेटी की याचिका खारिज की जाती है क्यों कि श्रंगार गौरी की पूजा के लिए डाली गई याचिका पोषणीय है। यह फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल जज जस्टिस जेजे मुनीर की बेंच ने सुनाया। शृंगार गौरी की नियमित पूजा की मांग को लेकर राखी सिंह समेत 9 अन्य ने वाराणसी की अदालत में सिविल वाद दाखिल किया था। बहस पूरी होने के बाद कोर्ट ने 23 दिसंबर 2022 को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

गौरी की पूजा की इजाजत मिली

इस केस में अपनी आपत्ति खारिज होने के खिलाफ मस्जिद की इंतजामियां कमेटी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। अर्जी में वाराणसी के जिला जज की अदालत से 12 सितंबर को आए फैसले को थी चुनौती दी गई थी। अदालत में वाद दाखिल करने वाली 5 महिलाओं समेत 10 लोगों को पक्षकार बनाया गया था।

वाराणसी के जिला जज की कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल की गई आपत्ति को पहले ही खारिज कर दिया था। मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि 1991 के प्लेसिस ऑफ वर्शिप एक्ट और 1995 के सेंट्रल वक्फ एक्ट तहत सिविल वाद पोषणीय नहीं है। जिला जज के इसी फैसले को मस्जिद कमेटी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। बता दें कि अभी महिलाओं को चैत्र और वासंतिक नवरात्र के चौथे दिन श्रृंगार गौरी की पूजा की इजाजत मिली हुई है।

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