Money Laundering Case: मनी लांड्रिंग के मामलों में PMLA की वैधता को चुनौती देकर जमानत मांगने की प्रवृत्ति गलत- SC

92
Money Laundering Case

India News (इंडिया न्यूज),Money Laundering Case,दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉंड्रिंग के मामलों में पीएमएलए की वैधता को चुनौती देने की आड़ में जमानत मांगने की प्रवृत्ति की निंदा की है। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने इसकी निंदा करते हुए कहा कि अधिनियम को चुनौती देने वाली ऐसी याचिकाएं दायर करना अन्य उपलब्ध कानूनी उपायों को दरकिनार करना है।

छत्तीसगढ़ में कथित शराब घोटाला मामले में जांच का सामना कर रहे लोगों द्वारा दायर याचिकाओं के एक बैच की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी की। न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और प्रशांत कुमार मिश्रा की अवकाश पीठ इस मामले पर सुनवाई कर रही है।

पीठ ने कहा कि अदालत विजय मदनलाल के फैसले के बावजूद धारा 15 और 63 और पीएमएलए के अन्य प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली धारा 32 के तहत इस अदालत में रिट याचिकाएं दायर करना एक प्रवृत्ति बन गई है। लेकिन याचिकाकर्ता ऐसे मामलों के निपटारे के लिए उन मंचो से किनारा कर रहे हैं, जो उनके लिए खुले हैं

मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ

पीठ ने टिप्पणी की कि सुप्रीम कोर्ट एक वैकल्पिक मंच बनता जा रहा है। हाई कोर्ट जाने और वहां के कानून के प्रावधानों को चुनौती देने के बजाय आरोपी सुप्रीम कोर्ट में सम्मन का विरोध कर रहे हैं।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने मदनलाल फैसले मेंमनी लॉंड्रिंग रोकथाम अधिनियम के तहत गिरफ्तारी,मनी लॉंड्रिंग में शामिल संपत्ति की कुर्की, तलाशी और जब्ती से संबंधित प्रवर्तन निदेशालय की शक्तियों को बरकरार रखा था। संविधान का अनुच्छेद 32 व्यक्तियों को यह अधिकार देता है कि यदि उन्हें लगता है कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है तो वे सर्वोच्च न्यायालय जा सकते हैं।

मामले की सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन याचिकाओं की विचारणीयता पर गंभीर आपत्ति जताई। मेहता ने कहा कि एक कानून की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली याचिका दायर करने और फिर बिना किसी दंडात्मक कार्रवाई के आदेश प्राप्त करने का एक नया चलन है। यह एक तरह से वास्तव में एक अग्रिम जमानत मांगने जैसा है। एसजी ने कहा कि इसे बिना किसी अनिश्चित शब्दों के बहिष्कृत किया जाना चाहिए। लोगों से संपर्क किया जा रहा है कि वे अग्रिम जमानत मांगने के बजाय कानून के दायरे को चुनौती दें।

SG की इन दलीलों का अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इस तरह की बार-बार दलीलों के साथ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने की प्रथा को बंद करने की जरूरत है।

यह भी पढ़ें : Witness Another Heinous Murder: साक्षी की तरह एक और जघन्य हत्या: सूरत का शख्स अपनी बेटी को 25 बार चाकू मारने के आरोप में गिरफ्तार!

यह भी पढ़ें : Supreme Court: प्रेमी संग भागी युवती ने घरवालों से बताया जान का खतरा

यह भी पढ़ें : Allahabad High Court: इलाहाबाद हाई कोर्ट का अहम फैसला: नाम बदलना नागरिक का मूल अधिकार

Connect With Us : Twitter, Facebook