Caste Equations : हरियाणा लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण बने डिसाइडिंग फैक्टर

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Caste Equations
हरियाणा लोकसभा चुनाव में जातीय समीकरण बने डिसाइडिंग फैक्टर
  • भाजपा व कांग्रेस ने मुख्य रुप से जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर ही किया है टिकटों का बंटवारा

India News (इंडिया न्यूज), Caste Equations : हरियाणा में छठे चरण में 25 मई को होने वाले चुनाव में महज 2 दिन बचे हैं और तमाम सियासी दल चुनावी रण को तरने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं। इसी चुनावी समर में सत्ताधारी और विपक्षी दलों ने इलेक्शन जीतने के लिए हर रणनीति पर जमकर मंथन किया है तो वहीं राजनीतिक तापमान की समझ रखने वालों का कहना है कि लोकसभा चुनाव की इस जंग में सबसे ज्यादा असर जातीय समीकरणों का रहने वाला है और जातीय आधार पर वोटों का ध्रुवीकरण होगा न कि क्षेत्र या मुद्दों के आधार पर।

सभी सीटों पर मुख्य मुकाबला सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस के बीच में माना जा रहा है। दोनों दलों ने सभी सीटों पर जो कैंडिडेट उतारे हैं वो पूरी तरह से जातीय समीकरणों को ध्यान में रखकर ही उतारे गए हैं। ये भी बता दें कि पिछले चुनाव के मुकाबले भाजपा ने 6 और कांग्रेस ने 7 सीटों पर चेहरे बदले हैं।

Caste Equations : जातीय समीकरण बने टिकट निर्धारण का आधार

जिस तरह से भाजपा व कांग्रेस ने टिकटों का वितरण किया है, उससे साफ है कि सबसे अहम पहलू जातीय समीकरण ही रहे। बेशक भाजपा ने सबसे पहले सभी 10 लोकसभा सीटों के लिए कैंडिडेट्स के नाम घोषित किए हों, लेकिन पार्टी ने जातीय समीकरणों के आधार पर ही ये किया। भाजपा ने दो-दो सीटों पर जाट और ब्राह्मण कैंडिडेट को मौका दिया है, वहीं चार सीटों पर पंजाबी, वैश्य, यादव और गुर्जर को मैदान में उतारा है।

वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इडी गठबंधन के तहत उसके हिस्से आई 9 सीटों में से दो-दो सीट पर जाट और ब्राह्मण को टिकट दी है। चार सीटों पर यादव, गुर्जर, पंजाबी और वैश्य को टिकट दी है जबकि दो सीट अंबाला और सिरसा हरियाणा में आरक्षित हैं तो यहां से दोनों ने एससी कैंडिडेट को उतारा है। हर सीट के सांचे को देखकर जातीय समीकरण फिट किए जा रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं है। पिछले चुनावों में भी जाट और गैर जाट जातियों के आधार पर चुनावी टिकट दिए गए।

जातीय समीकरणों के मद्देनजर ही भाजपा ने 6 और कांग्रेस ने 7 चेहरे बदले

भाजपा ने अबकी बार 6 लोकसभा कैंडिडेट्स को बदल दिया है तो चार पुराने सिटिंग सांसदों को टिकट दी है। पार्टी ने सिरसा में सुनीता दुग्गल की जगह अशोक तंवर, करनाल में संजय भाटिया की जगह पूर्व सीएम मनोहर लाल, सांसद से सीएम बने नायब सिंह सैनी की सीट कुरुक्षेत्र में कांग्रेस से आए नवीन जिंदल, हिसार में ऊर्जा मंत्री रणजीत सिंह चौटाला, अंबाला में रतन लाल कटारिया का निधन हो जाने की वजह से उनकी पत्नी बंतो कटारिया को टिकट दिया है।

वहीं पार्टी ने चार सांसदों रोहतक से अरविंद शर्मा, गुरुग्राम से केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत, फरीदाबाद से केंद्रीय मंत्री कृष्ण पाल गुर्जर और भिवानी-महेंद्रगढ़ से धर्मबीर सिंह पर विश्वास जताते हुए फिर से टिकट दी है। वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने 7 लोकसभा के पिछले उम्मीदवारों को रिप्लेस कर दिया है।

कांग्रेस ने गुरुग्राम में अजय यादव की जगह अभिनेता से नेता बने राज बब्बर, भिवानी-महेंद्रगढ़ से श्रुति चौधरी की जगह राव दान सिंह, सोनीपत से भूपेंद्र हुड्डा की जगह सतपाल ब्रह्मचारी, करनाल में दिव्यांशु बुद्धिराजा और फरीदाबाद से अवतार भड़ाना की जगह महेंद्र प्रताप को मौका दिया है। फरीदाबाद से महेंद्र प्रताप सिंह को और कुमारी सैलजा को अंबाला की बजाय सिरसा से टिकट दिया।

सीट वाइज जातीय समीकरण देख मार्किंग कर उतारे कैंडिडेट्स

हिसार, फरीदाबाद, करनाल, कुरुक्षेत्र और सोनीपत ऐसी पांच लोकसभा सीट हैं जहां से भाजपा व कांग्रेस ने हर सीट पर एक ही जाति विशेष के उम्मीदवारों को तव्वजो दी है। फरीदाबाद सीट से दोनों पार्टियों ने गुर्जर, करनाल से पंजाबी, सोनीपत से ब्राह्मण, कुरुक्षेत्र में बनिया और हिसार से जाट कैंडिडेट्स को उतारा है। हिसार अकेली ऐसी सीट पर जहां इनेलो और जजपा ने भी कांग्रेस व भाजपा के अलावा जाट कैंडिडेट्स कौ मौका दिया है।

यादव प्रभाव वाली गुरुग्राम सीट पर पंजाब समुदाय के करीब 2 लाख वोटर्स को अपने पक्ष में करने के लिए कांग्रेस ने अभिनेता राज्य बब्बर को टिकट दी है। कांग्रेस का मानना है कि फरीदाबाद सीट में जाट और मुस्लिम समुदाय उसके पक्ष मे है तो यहां के गुज्जर वोटर्स को खींचने के लिए गुर्जर समुदाय के महेंद्र प्रताप सिंह उचित विकल्प रहे। कुरुक्षेत्र सीट से भाजपा और इंडी गठबंधन के तहत आप दोनों ने ही बनिया समुदाय के कैंडिडेट को टिकट दी है तो वहीं इनेलो ने जाट कैंडिडेट अभय चौटाला को उतारा है।

मुकाबला बराबरी का है कई सीटों पर

भाजपा पिछली बार की तरह सभी 10 लोकसभा सीट जीतकर इतिहास रचने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है वहीं कांग्रेस की कोशिश है कि कम से कम 4 से 5 सीट वो जीत आने वाले विधानसभा चुनाव में इसका फायदा ले।

पिछले दिनों पंचकूला में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ बैठक में उनको ये इनपुट दिया गया कि कई सीटों पर कांग्रेस के साथ बेहद ही कड़ा मुकाबला है, इनमें रोहतक व सिरसा सीट मुख्य रुप से शामिल है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस खुद को रोहतक, सिरसा और सोनीपत में ज्यादा मजबूत मान रही है तो वहीं करनाल, गुरुग्राम और फरीदाबाद सीट पर भाजपा खुद को सुखद अवस्था में महसूस कर रही है। इसके अलावा बाकी बचीं चार अंबाला, हिसार, भिवानी-महेंद्रगढ़ और कुरुक्षेत्र दोनों के बीच कड़ा मुकाबला है।

    सीट                     भाजपा                          कांग्रेस
1. अबाला            बंतो कटारिया (एसी)         वरुण चौधरी (एससी)
2. कुरुक्षेत्र            नवीन जिंदल (बनिया)       सुशील गुप्ता (बनिया)
3. करनाल           मनोहर लाल (पंजाबी)        दिव्य़ांशु बुद्धिराजा (पंजाबी)
4. सोनीपत          मोहन लाल बडौली (ब्राह्मण) सतपाल ब्रह्मचारी (ब्राह्मण)
5. रोहतक           अरविंद शर्मा (ब्राह्मण)        दीपेंद्र सिंह हुड्डा (जाट)
6. गुरुग्राम           राव इंद्रजीत (यादव)           राज बब्बर (पंजाबी)
7. फरीदाबाद        कृष्णपाल गुर्जर (गुर्जर)        महेंद्र प्रताप सिंह (गुर्जर)
8. भिवानी-महेंद्रगढ़  धर्मबीर सिंह (जाट)           राव दान सिंह (यादव)
9. हिसार             रणजीत सिंह (जाट)            जेपी (जाट)
10. सिरसा           अशोक तंवर (एसी)            कुमारी सैलजा (एससी)

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