Karnal Assembly Constituency : करनाल विधानसभा में सैनी समाज का अन्य समाज से है बेहद कम वोट बैंक, कैसे कर पाएंगे जीत हासिल

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Karnal Assembly Constituency
करनाल विधानसभा में सैनी समाज का अन्य समाज से है बेहद कम वोट बैंक, कैसे कर पाएंगे जीत हासिल
  • नायब सैनी के सामने कई चुनौतियां, कौन सी जाति पड़ सकती है सीएम पर भारी

इशिका ठाकुर, India News (इंडिया न्यूज), Karnal Assembly Constituency, चंडीगढ़ : पिछले साढ़े 4 वर्षों से हरियाणा में भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार रही, लेकिन लोकसभा चुनावों से पहले यह गठबंधन टूट गया। इसके चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने सीएम और विधायक पद से इस्तीफा दे दिया। भारतीय जनता पार्टी द्वारा कुरुक्षेत्र सांसद नायब सैनी को मुख्यमंत्री बना दिया गया, लेकिन प्रोटोकॉल के अनुसार उनका विधायक बनना जरूरी है, जिसके बाद वह नियमानुसार मुख्यमंत्री बन पाएंगे।

बता दें कि मनोहर लाल करनाल विधानसभा से दो बार विधायक बने और दोनों ही बार मुख्यमंत्री बने। करनाल विधानसभा सीट खाली हो चुकी है, जिसके चलते लोकसभा चुनाव के साथ करनाल विधानसभा सीट का उपचुनाव भी 25 मई को होने जा रहा है। नायब सैनी के करनाल विधानसभा से जीतने के लिए क्या-क्या चुनौतियां हैं और करनाल विधानसभा का कौन सी जाति का कितना वोट बैंक है, हम आज इसी पर चर्चा कर रहे हैं।

करनाल विधानसभा में कुल इतने मतदाता

आंकड़ों के अनुसार करनाल विधानसभा सीट पर 2,58,361 मतदाता हैं, जिसमें सबसे ज्यादा वोट पंजाबी, खत्री और अरोड़ा जाति की करीब 62 हजार वोट हैं। वहीं अग्रवाल समाज की अगर बात करें तो उनकी करीब 21,000 वोट, रविदासिया समाज की करनाल विधानसभा में करीब 19000 वोट, ब्राह्मण समाज की करीब 18000 वोट, रोड समाज की करीब 25000 वोट, जाट समाज की करीब 11000 वोट, जाट सिख समाज की करीब 10000 वोट, वाल्मीकि कश्यप और राजपूत समाज के करीब 9 -9 हजार वोट, सैनी समाज की करीब 6000 वोट, गडरिया समाज की करीब 6500 वोट, गुर्जर और कंबोज की करीब 5-5 हजार वोट है बाकी अन्य जाति की है। यह करनाल विधानसभा की मुख्य जातियां हैं जिसमें सबसे ज्यादा पंजाबी जाति का वोट बैंक है तो इनमें सबसे कम करीब 6000 सैनी समाज का वोट बैंक है।

करीब 6,000 वोट से कैसे जीत हासिल कर पाएंगे नायब सैनी

कई बार अपने भाषणों में पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल करनाल को एक बार फिर से सीएम सिटी बनाने की बात कहते हुए सुने गए हैं। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि नायब सैनी ही भारतीय जनता पार्टी के करनाल विधानसभा उपचुनाव में प्रत्याशी के रूप में चेहरा होंगे, लेकिन बड़ी बात है कि नायब सैनी, सैनी समाज से संबंध रखते हैं और करनाल विधानसभा में सैनी समाज की करीब 6,000 वोट है।

विधानसभा चुनाव में जातिगत वोट बैंक काफी अहमियत रखता है तो ऐसे में नायब सैनी इतनी कम वोटों में जीत हासिल नहीं कर पाएंगे, वहीं अगर पंजाबी अरोड़ा खत्री समाज की बात करें इस समाज के करीब 63,000 वोट करनाल विधानसभा में है और मनोहर लाल पंजाबी समाज से हैं तो कहीं न कहीं मनोहर लाल के चेहरे पर ही नायब सैनी यहां से चुनाव लड़ने वाले हैं, लेकिन पंजाबी समाज नायब सैनी का कितना समर्थन करता है यह तो आने वाले समय में ही देखने को मिलेगा।

मनोहर लाल को पंजाबी वर्ग का मिला था भारी समर्थन, दो बार बने विधायक

वहीं बता दें कि करनाल विधानसभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के दो बार विधायक रह चुके मनोहर लाल यहां दोनों बार ही काफी मतों से विधायक बने थे। 2014 चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के द्वारा मनोहर लाल को अपना प्रत्याशी बनाया गया था, जिन्होंने 2014 चुनाव में 82485 वोट प्राप्त किए थे।

यह जीत उन्होंने 63773 वोट के मार्जिन से हासिल की थी, उनको 58.75% वोट प्राप्त हुए थे। 2019 विधानसभा चुनाव में मनोहर लाल को भारतीय जनता पार्टी के द्वारा एक बार फिर से अपना प्रत्याशी बनाया गया था, जिसमें उन्होंने 79,906 वोट प्राप्त हुए थे, जिसमें उन्होंने 45188 वोट के मार्जन से जीत हासिल की थी। उनको 63.72% वोट प्राप्त हुए थे, वहीं मनोहर लाल को अब करनाल लोकसभा से भारतीय जनता पार्टी के द्वारा अपना प्रत्याशी बनाया गया है तो बीजेपी इस बार भी यही सोच रहेगी कि पंजाबी वर्ग का वोट बैंक ज्यो का त्यों बना रहे और वह वोट बैंक नायब सैनी के पक्ष में परिवर्तित हो जाए।

मनोहर लाल के सहयोग के बिना नायब सैनी की जीत मुश्किल

मनोहर लाल पिछले करीब 2 साल से करनाल में रहकर अपना अच्छा जन समर्थन बना चुके हैं, लेकिन नायब सैनी के लिए जीत की राह आसान नहीं होगी, जिसके चलते उनको पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल के सहयोग की आवश्यकता रहेगी, लेकिन मनोहर लाल भी करनाल लोकसभा से संसद का चुनाव लड़ रहे हैं तो ऐसे में अपने चुनाव प्रचार के बीच में उनको नायब सैनी के लिए भी प्रचार करना होगा, तभी नायब सैनी कों करनाल विधानसभा से जीत हासिल हो सकती है।

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